पी. एन. दास कॉलेज में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के सहयोग से धूमधाम से मनाया गया ‘हिंदी दिवस’ पलता (बैरकपुर): पलता स्थित पी. एन. दास कॉलेज में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी पखवाड़ा’ बड़े ही उत्साह और गरिमामय माहौल में मनाया गया। इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जनमानस के बीच हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ाना और रोज़मर्रा के कामकाज व बातचीत में इसके सहज इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शर्मिला दे ने की , जबकि मंच की पूरी रूपरेखा और संचालन का ज़िम्मा हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बखूबी संभाला। समारोह के मुख्य वक्ता , राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ कॉलेज (बैरकपुर) के सहायक प्राध्यापक डॉ. बिक्रम कुमार साव ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली मज़बूत कड़ी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि हिंदी का विकास देश की तमाम क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को पूरा आदर व सम्मान देकर ही मुमकिन हो सकता है। जब सभ...
संदेश
आँचल की छाँव , संपादक: डॉ. अजय चौधरी
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
रिश्तों के मरुस्थल में संवेदना की शीतल बयार ' आँचल की छाँव ' अर्पणा चौधरी वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाएँ जैसे दम तोड़ती जा रही हैं। आधुनिकता और आपाधापी की अंधी दौड़ में लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं कि अपने ही परिवार के लिए समय निकालना दूभर हो गया है। व्यस्तता का आलम यह है कि एक ही छत के नीचे रहने वाले परिजन कई-कई दिनों तक आपस में संवाद नहीं करते , और यदि बात होती भी है , तो वह केवल औपचारिकता या काम तक सीमित रह जाती है। इस संवादहीनता के कारण परिवार के सदस्यों के बीच की दूरियाँ और खाई दिनों-दिन गहरी होती जा रही हैं। ऐसे विषम और संवेदनहीन समय में माँ के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके असीम संघर्षों को स्मरण करना , हृदय को सच्ची शांति और सुकून प्रदान करता है। आज जहाँ रिश्तों में कड़वाहट और अलगाव घुलता जा रहा है , वहीं पारिवारिक संबंधों को पुन: प्रेम , अपनत्व और आत्मीयता के धागे में पिरोने का स्तुत्य प्रयास डॉ. अजय चौधरी द्वारा संपादित पुस्तक ‘ आँचल की छाँव’ में दिखाई देता है। यह कृति बिखरते रिश्तों में एक बार फिर स्नेह की गर्माहट घोलने का कार्य ...
आपके पत्र मेरे नाम : विजय कुमार तिवारी
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
संवेदनाओं की वापसी और संवाद का पुनर्जीवन अजय चौधरी Mob: 8981031969 ajaychoudharyakc81@gmail.com टेक्नोलॉजी के इस आधुनिक दौर में पत्र-लेखन की आदत एक धुंधली स्मृति बनकर रह गई है। विज्ञान और तकनीक ने संपर्क साधने के लिए हमें एक से बढ़कर एक साधन उपलब्ध करा दिए हैं , जिनमें सबसे महत्वपूर्ण और सर्वव्यापी साधन मोबाइल है। जहाँ एक ओर मोबाइल ने मीलों की दूरियों को मिटाकर संबंधों के तार जोड़े हैं , वहीं दूसरी ओर इसने हमारी आत्मिक संवेदना का गहरा ह्रास भी किया है। आज संवेदनाएं मात्र सूचनात्मक होकर रह गई हैं। सगे-संबंधियों से बात करना सिर्फ सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित हो गया है। विडंबना यह है कि आज सभी के हाथ में मोबाइल है , लेकिन अपने ही रिश्तेदारों से जी भरकर बात करने का समय किसी के पास नहीं है। बातें उतनी ही होती हैं , जितने में आवश्यक सूचना साझा हो जाए। परिणामस्वरूप , रिश्तों में जो गहराई और आत्मिक संबंध हुआ करते थे , उनका लोप हो गया है। जब पत्र और चिट्ठियों का दौर था , तब इंसान दूसरे इंसान से मिलने और बात करने के लिए तरस जाता था , उस समय संपर्क का ए...