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मिस रमिया (उपन्यास) : कावेरी, समीक्षक: अजय चौधरी

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  पुस्तक: मिस रमिया (उपन्यास) लेखक: कावेरी प्रकाशन: स्वराज प्रकाशन, नई दिल्ली वर्ष: 2022 समीक्षक: अजय चौधरी  मूल्य: 395/-    आधुनिक दलित साहित्य में स्त्री विमर्श के नए आयाम’ (कावेरी जी कृत उपन्यास ‘मिस रमिया’ के संदर्भ में)   अजय चौधरी Mob: 8981031969   हिंदी दलित साहित्य के प्रारंभिक दौर में पुरुष रचनाकारों जैसे ओमप्रकाश वाल्मीकि , मोहनदास नैमिशराय , तुलसी राम आदि का वर्चस्व था। परिस्थितियाँ बदली, समय के साथ महिला साहित्यकारों ने भी अपनी पीड़ा और शोषण गाथा को हथियार बनाकर इस क्षेत्र में अपने होने का एहसास और उपस्थिति दर्ज कराई। उन्हीं नामों में से एक कावेरी जी का भी हैं, जिन्होंने ने ' मिस रमिया ' जैसे उपन्यासों के माध्यम से इस विमर्श में स्त्री के स्वर को मजबूती प्रदान की। इनका स्थान उन गिने-चुने दलित महिला उपन्यासकारों में है , जिन्होंने दलित स्त्री , जातिगत भेदभाव का शिकार के साथ पुरुषवादी मानसिकता, पितृसत्ता के विरुद्ध भी उतनी ही प्रखरता से संघर्ष करती है। इनका महत्व इस बात में भी है कि उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के दर्शन और नारों को पात्रों के जी...

सरप्राइज और लड़की (कहानी-संग्रह) : कृष्ण कुमार भगत

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पुस्तक: सरप्राइज और लड़की (कहनी-संग्रह) लेखक: कृष्ण कुमार भगत प्रकाशक: न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली वर्ष: 2025 समीक्षक: अजय चौधरी मूल्य: 250/-    यथार्थ की ज़मीन पर रिश्तों और व्यवस्था का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण   अजय चौधरी 8981031969   साहित्य की सभी विधाओं में ' कहानी ' मानव जीवन और समाज के नब्ज पकड़ने के साथ संवेदनाओं के सबसे निकटतम होने के कारण सर्वोपरि विधा के रूप में स्वीकार किया गया है। कहानी अब मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा है , यह समाज के मौजूदा हालात की यथार्थ  तस्वीर बयां करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस विधा की असली शक्ति उसकी संवेदना और यथार्थवाद में निहित है। यह पात्रों के सुख-दुख और उनके मानसिक अंतर्द्वंद्व से इस कदर जोड़ देती है कि वह स्वयं को कथा का हिस्सा महसूस करने लगता है। देखा जाता है कि सामाजिक चेतना जागृत करने में कहानी एक अमोघ अस्त्र की तरह काम कर रही है। वर्तमान व्यवस्था की विसंगतियों पर , प्रशासनिक संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए कहानी एक कारगर हथियार का कार्य करती है। कहानी संग्रह ‘सरप्राइक और...

अहम बहै दरियाव - शिवमूर्ति

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  भारतीय गाँव के रिसते हुए घावों और अंतहीन संघर्ष का महाकाव्य (उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ के संदर्भ में)                  शिवमूर्ति की पहचान एक ऐसे कथाकार के रूप में है जो गाँव को रोमानियत के चश्मे से नहीं देखते। उनकी कहानियाँ जैसे ‘ तिरिया चरित ’, ‘ कसाईबाड़ा ’ और उपन्यास समाज के उस तल छट को उकेरते हैं जहाँ कानून , संविधान और विकास की किरणें पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ‘ अगम बहै दरियाव ’ में भी उन्होंने अपनी इसी शैली को विस्तार दिया है , जहाँ उन्होंने व्यवस्था के नग्न सत्य को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत किया है। समकालीन हिंदी कथा साहित्य के कथाकार शिवमूर्ति उन सशक्त हस्ताक्षर हैं , जिनकी लेखनी ग्रामीण भारत की नसों में बहते दर्द , संघर्ष और विद्रूपताओं को पूरी ईमानदारी और बेबाकी से पकड़ती है। उनका उपन्यास ‘ अगम बहै दरियाव ’ इसी यथार्थवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। समकालीन हिंदी कथा साहित्य के उन विरले रचनाकारों में से हैं जिनकी कलम गाँव की पगडंडियों से गुजरते हुए वहां की धूल , पसीने और रक्त की गंध को जस का तस कागज़ प...