अहम बहै दरियाव - शिवमूर्ति
भारतीय गाँव के रिसते हुए घावों और अंतहीन संघर्ष का महाकाव्य (उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ के संदर्भ मे अजय चौधरी 8981031969 शिवमूर्ति की पहचान एक ऐसे कथाकार के रूप में है जो गाँव को रोमानियत के चश्मे से नहीं देखते। उनकी कहानियाँ जैसे ‘ तिरिया चरित ’, ‘ कसाईबाड़ा ’ और उपन्यास समाज के उस तल छट को उकेरते हैं जहाँ कानून , संविधान और विकास की किरणें पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ‘ अगम बहै दरियाव ’ में भी उन्होंने अपनी इसी शैली को विस्तार दिया है , जहाँ उन्होंने व्यवस्था के नग्न सत्य को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत किया है। समकालीन हिंदी कथा साहित्य के कथाकार शिवमूर्ति उन सशक्त हस्ताक्षर हैं , जिनकी लेखनी ग्रामीण भारत की नसों में बहते दर्द , संघर्ष और विद्रूपताओं को पूरी ईमानदारी और बेबाकी से पकड़ती है। उनका उपन्यास ‘ अगम बहै दरियाव ’ इसी यथार्थवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। समकालीन हिंदी कथा साहित्य के उन विरले रचनाकारों में से हैं जिनकी कलम गाँव की पगडंडियों से गुजरते हुए वहां की धूल , पसीने और रक्त की गंध को जस का तस कागज़ पर उतार देती है। उनका उपन्...