गूँगी व्यवस्था और जलते सवाल (‘उजला अँधेरा’ की ज़मीनी पड़ताल) डॉ . अजय चौधरी 8981031969 ajaychoudharyac@gmail.com जब कोई कृति अपनी सशक्त विषय-वस्तु के साथ अभिव्यक्ति की एक मौलिक शैली चुनती है , तो वह समकालीन साहित्य में अपनी एक विशिष्ट और अमिट पहचान बना लेती है। कैलाश वानखेड़े का उपन्यास ‘ उजला अँधेरा’ ठीक ऐसी ही रचना है। इस उपन्यास का कथानक , उसका सामाजिक-भौगोलिक परिवेश , लोक-संवेदना से संपृक्त भाषा और सहज-प्रवाहपूर्ण संवाद-शैली के साथ उद्देश्य का जो ताना-बाना बुन गया है, इसे अन्य सामाजिक उपन्यासों से पूरी तरह अलग करते हैं। हम देखते हैं कि अधिकांश सामाजिक उपन्यासों में व्यवस्था और अभावग्रस्त जीवन को बाहर से देखकर , एक दर्शक या विश्लेषक की दृष्टि से चित्रित किया जाता है। इसके विपरीत , इस उपन्यास में कथा का परिवेश उपदेशक की मेज या मंच न होकर शहर से धकियाई गई गंदी बस्तियों , रिसती नालियों , कबाड़खानों और सड़क किनारे टायर के पंचर पकाने वाली खुली दुकानों से आकार लेता है। लेखक ने बारिश में टपकती छतों , घरों में घुसते मटमैले पानी और अभावों के बीच धड़कते मानवीय जीवन को बिना किसी...
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फल्गु के कछार से संघर्ष , चेतना और यथार्थ डॉ . अजय चौधरी मोब : 8981031969 ajaychoudharyac@gmail.com आत्मकथा लिखना एक चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा कार्य है। आत्मकथाकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जीवन के किन प्रसंगों को दर्ज किया जाए और किसे छोड़ दिया जाए। इसी मोड़ पर उसकी ईमानदारी दांव पर लगती है। व्यक्ति जीवन की कुछ ऐसी व्यक्तिगत घटनाओं और कटु स्मृतियों को मस्तिष्क के किसी कोने में दबाकर रखता है , जिससे दुनिया अनजान होती है। परंतु जब आत्मकथा लेखन का क्षण आता है , तो ये सुप्त स्मृतियां स्वतः स्फूर्त होकर बाहर निकल आती हैं। लेखक का व्यक्तिगत पक्ष जब सार्वजनिक होता है , तो वह एक व्यक्ति की कहानी न रहकर संपूर्ण समाज और समूह के अनुभवों से जुड़कर सत्य की प्रामाणिकता को उजागर करता है। दलित लेखन में आत्मकथाएँ एक व्यक्ति का स्व-वृत्तांत के रूप में समाज की प्रामाणिक घटना प्रस्तुत करती हैं , जिससे पूरा समाज परिचित हो पाता है। मूल रूप से इसमें समाज द्वारा किए गए उत्पीड़न , अपमान और एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग के प्रति निभाई गई अंतर्भावनाओं का प्रत्यक्ष चित्रण होता है। ...
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पी. एन. दास कॉलेज में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के सहयोग से धूमधाम से मनाया गया ‘हिंदी दिवस’ पलता (बैरकपुर): पलता स्थित पी. एन. दास कॉलेज में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी पखवाड़ा’ बड़े ही उत्साह और गरिमामय माहौल में मनाया गया। इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जनमानस के बीच हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ाना और रोज़मर्रा के कामकाज व बातचीत में इसके सहज इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शर्मिला दे ने की , जबकि मंच की पूरी रूपरेखा और संचालन का ज़िम्मा हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बखूबी संभाला। समारोह के मुख्य वक्ता , राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ कॉलेज (बैरकपुर) के सहायक प्राध्यापक डॉ. बिक्रम कुमार साव ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली मज़बूत कड़ी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि हिंदी का विकास देश की तमाम क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को पूरा आदर व सम्मान देकर ही मुमकिन हो सकता है। जब सभ...